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नई दिल्ली। वर्ष 1857 से लेकर 1947 तक चले स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के गुमनाम वंशजों व परिवारों की दास्तां बयां करती फिल्म का पहली बार प्रदर्शन वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा सदस्य एच. के. दुआ की मौजूदगी में आज यहां प्रेस क्लब में किया गया।
फिल्म ‘एक खोज : भारत की’ में क्रांतिकारी सेनानी मंगल पांडेय से लेकर तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, उधम सिंह, बहादुर शाह जफर, अवध के नवाब वाजिद अली शाह समेत अन्य स्वतंत्रता सेनानियो के अलावा उस्ताद बिस्मिल्ला खान के जीवित गुमनाम वंशजों की हकीकत बयां की गयी है।
वरिष्ठ पत्रकार शिवनाथ झा और उनकी पत्नी नीना ने सात साल पहले शहनाई वादक भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खान के लिए ‘आंदोलन..एक पुस्तक से’ अभियान की शुरूआत की थी और उन्होंने इसके बाद सिलसिलेवार कई स्वतंत्रता सेनानियों के वंशजों की खोज की है जिनमें से अधिकतर दयनीय हालत में हैं।
झा के 14 वर्षीय पुत्र आकाश ने अपने माता..पिता की मेहनत को फिल्मी रूप देने का फैसला किया और कैमरा आदि का योगदान देकर एक घंटे की फिल्म तैयार की।
झा ने दावा किया कि फिल्म की डीवीडी की बिक्री से होने वाली आय को शहीद खुदी राम बोस के गुरू दिवंगत सत्येंद्र नाथ बोस के 85 वर्षीय एक वंशज के उपचार के लिए दिया जाएगा।
उनके आंदोलन का मकसद स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों का पता लगाना और उन्हें जरूरी मदद के लिए पहल करना है।
24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम और जन गण मन को आधिकारिक रूप से संविधान सभा ने क्रमश: राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के रूप में अपनाया था, इस लिहाज से झा परिवार ने फिल्म का विमोचन आज किया।
फिल्म का विमोचन लखनउच्च्, भोपाल, पटना, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई, जयपुर, बेंगलूर, भुवनेश्वर, रांची, चंडीगढ़, पणजी समेत सभी प्रदेशों की राजधानियों में भी करने की योजना है।