वरिष्ठ पत्रकार और एबीपी न्यूज़ के पूर्व संपादक शाजी ज़मा का उपन्यास 'अकबर' जल्द ही बाजार में आने वाली है. सो इसके प्रचार-प्रसार का काम भी शुरू हो गया. न्यूज़ इंडस्ट्री के लोगों की भी खासी रूचि इस किताब में है और उनकी प्रतिक्रियाएं भी आने लगी है. इसकी कड़ी में हमेशा की तरह पहली प्रतिक्रिया इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक अजीत अंजुम की आयी है. पढ़िए शाज़ी ज़मा की किताब के बारे में उनकी भविष्यवाणी -
शाजी ज़मा का उपन्यास 'अकबर'[/caption]शाजी ज़मां हिन्दी टीवी चैनलों के सबसे संजीदा और संवेदनशील पत्रकारों में से एक हैं ..शाजी कम बोलते हैं ,कम दिखते हैं , कम लिखते हैं , कम लिखते हैं , कम मिलते हैं लेकिन जो भी सोचते और रचते हैं , वो सबसे अलहदा होता है..शायद इसलिए भी कि वो कहने - बताने से ज़्यादा चुपचाप करते रहने में यक़ीन करते हैं ...
शाजी को मैं क़रीब पंद्रह सालों से जानता हूँ और जितना जानता हूँ ,उसके आधार पर कह सकता हूँ कि उनकी ये किताब साहित्य की दुनिया में हलचल मचाएगी ..अकबर जैसे किरदार पर शाजी ने इतना काम करके कुछ रचा है तो ये हर साल छपने वाले उपन्यासों की भीड़ से अलग होगा ..
अजीत अंजुम,प्रबंध संपादक,इंडिया टीवी[caption id="attachment_27327" align="alignright" width="194"]
शाजी ज़मा का उपन्यास 'अकबर'[/caption]शाजी ज़मां हिन्दी टीवी चैनलों के सबसे संजीदा और संवेदनशील पत्रकारों में से एक हैं ..शाजी कम बोलते हैं ,कम दिखते हैं , कम लिखते हैं , कम लिखते हैं , कम मिलते हैं लेकिन जो भी सोचते और रचते हैं , वो सबसे अलहदा होता है..शायद इसलिए भी कि वो कहने - बताने से ज़्यादा चुपचाप करते रहने में यक़ीन करते हैं ...
शाजी को मैं क़रीब पंद्रह सालों से जानता हूँ और जितना जानता हूँ ,उसके आधार पर कह सकता हूँ कि उनकी ये किताब साहित्य की दुनिया में हलचल मचाएगी ..अकबर जैसे किरदार पर शाजी ने इतना काम करके कुछ रचा है तो ये हर साल छपने वाले उपन्यासों की भीड़ से अलग होगा ..
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