हिंदी के पत्रकार, एंकर और चैनल संपादक आदि अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग धड़ल्ले से करते हैं लेकिन कई बार ये प्रयोग गैरजरूरी होता है. इसी विषय पर वरिष्ठ पत्रकार ‘राहुल देव’ टिप्पणी करते हुए फेसबुक पर लिखते हैं -
किस किस को कहें...हिन्दी के कई पत्रकार, एंकर, चैनल संपादक धड़ाधड़, एंकरिंग करते हुए बट बोलते हैं पर, किन्तु, लेकिन के लिए।
उन्हें पता ही नहीं चलता वह हिंग्लिश के इतने आदी हो गए हैं कि कब हिन्दी के घोर परिचित और आम शब्द उनकी ज़ुबान से बाहर हो गए और अंग्रेजी के शब्द ही नहीं पूरे के पूरे वाक्यांश और अभिव्यक्तियां आकर बैठ गई हैं।
आप भी ध्यान से सुनिए - गिनिए कितने हिन्दी वाले बट बोल रहे हैं। मुझे तो लगता है कम से कम दिल्ली में तो लगभग 80 प्रतिशत।
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