सुयश सुप्रभइंडियन एक्सप्रेस की दलाल पत्रकारिता का नमूना देखिए। श्रमिकों का खून चूसने वाले नियम बनाने वाली राजस्थान सरकार के काम की तारीफ़ करते हुए खबर के शीर्षक में लिखा गया है - 'Rajasthan shows way in labour reforms'। एक नियम यह बनाया गया है कि अब उद्योगपति 300 श्रमिकों को बिना किसी सरकारी अनुमति के नौकरी से निकाल सकते हैं। ठेके पर काम देने वाली कंपनियाँ अब 50 श्रमिकों को बिना किसी नियम-कायदे के काम पर रख सकती हैं। ऐसे 'प्रगतिशील' नियमों की तारीफ़ करने वाले अखबारों को हिंद महासागर में फेंकने का समय आ गया है। सवाल यह भी है कि हिंद महासागर जाएँगे कैसे। गरीबों की समस्याओं का कोई अंत नहीं है... (स्रोत-एफबी)
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