बागों में बहार है, काली कमाई अब ख्वाब है : आजादी के 70 साल बाद देश के प्रधानमंत्री ने कालेधन के विरुद्ध देशहित में एक अत्यंत साहसी एवं कठोर निर्णय लिया जिसका देश के हर जनमानस ने स्वागत किया। लेकिन देश के चौथे स्तम्भ मीडिया के कुछ चैनल,अखबार,एजेंडाधारी पत्रकारो को तो इस निर्णय से जैसे लकवा मार गया ।कुछ पत्रकार ,मीडिया चैनल तो जनता की परेशानियो को आधार बना कर इस फैसले को वापस लेने के लिये सरकार पर लगातार दबाव डाल रहे है।
कुछ दिन पहले पत्रकार राजदीप सरदेसाई,रवीश कुमार की नोटबन्दी पर रिपोर्टिंग बेहद नकारात्मक, जनता की तकलीफ के नाम पर काले कारोबारियों को खुश करने जैसी प्रतीत हुई।क्या बागों में बहार आने की वजह काला कारोबार है ये सवाल रवीश से जरूर बनता है।
कुछ साल पहले खबरों में आया की राजदीप ने दिल्ली के पाश इलाके में 50 करोड़ का आलीशान घर खरीदा आखिर ये पत्रकार से कैसे धनकुबेर बन गए ये जांच का विषय है लेकिन इन पर कोई क्यों सवाल नहीं उठाता ।वहीँ 2400 करोड़ के कर चोरी,हवाला,मनी लांड्रिंग,फर्जी कम्पनियो के मामले में फंसे ndtv के मुखिया प्रणव राय आज अपनी कुंठा चैनल के पत्रकारों के माध्यम से निकाल रहे है।
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला अपने चैनल News 24 का इस्तेमाल बड़ी धूर्तता से जनता के कंधों पर बन्दूक रखकर नरेंद्र मोदी पर लगातार निशाना साध रहे हैं। वहीँ आजतक के क्रातिकारी पत्रकार पुण्यप्रसून वाजपेयी दस्तक के एजेंडा आधारित ,कुतर्क के प्राइमटाइम के जरिये काले कारोबारियों के सबसे बड़े हिमायती बने है।
नोट बंदी से हजारों करोडो के काले चंदे ,चिटफंड घोटाले के आरोपी बड़े नेताओं को बेनकाब करने की बजाय कुछ मीडिया संस्थान उनकी भ्रष्ट आवाज को बुलंद करके इस बड़ी मुहीम को बर्बाद करने में लगे है ।कितना शर्मनाक है की ईमानदारी, सादगी के प्रतीक बने धूर्त राजनेता,पत्रकार,चैनल आज कालेधन के राक्षस की मजबूत भुजाएं बन गए है। इन्हें ये जरा भी आभास नहीं है की इस एक कदम से मोदी के साथ अपार जनमानस लगातार जुड़ रहा है और इस मुहीम का समर्थन कर रहा है।
(-अभय सिंह- लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)
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