जगदीश्वर चतुर्वेदी
मोदी की असभ्यता का एक नमूना देखें- पत्रकार ने सवाल पूछा तो मोदी ने तपाक से जो कहा,वह पूरा पढें-
"राजीव खांडेकर: मोदी जी जब 2002 के दंगों की बात आती है और हमेशा आप से ये अपेक्षा होती है और आप इसका कई बार सैकड़ों बार जवाब दे चुके हैं कि मैं उसके बारे में उस वक्त बोल चुका हूं जो मुझे बोलना है 2002 में …
मोदी : सब कुछ बोलता हूं… ऐसा नहीं है झूठ बोल रहे हैं आप मेहरबानी कीजिए..ये भाषा ठीक नहीं है आपकी . मैं 2007 तक हर व्यक्ति को हर सवाल का हर समय जवाब दिया है, प्रिंट मीडिया में पड़ा है... इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पड़ा है, आप लोग इसको रिसर्च कीजिए आप को बुरा लगे भला लगे और आप चाहो कि मैं आपसे दब जाऊं तो होने वाला नहीं है"
"झूठ बोल रहे हैं'' , ''आपसे दब जाऊं'' ,ये पदबंध बताते हैं कि मोदी मीडियावालों को कैसे देखते हैं !!
ज्योंही चुभता सवाल पूछा गया मोदी तुरंत असभ्यनेता की भाषा में बोले- किसका एजेण्डा लेकर आए हो।
मोदी बाबू, सीधे सवालों के सीधे जबाव दो। जबाव नहीं हैं तो कह दो नहीं जानता।
हेकड़ी की भाषा में नेता के बोलने को मीडियाभाषा में असभ्य माना जाता है।
(स्रोत-एफबी)
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