-ओम प्रकाश-
• 2 नवंबर को 30,000 पोस्ट सोशल मीडिया पर किए गए, 95 फीसदी लोगों ने रागा-केजरी गुट के राजनीतिक स्टंट को नकारा . अंतिम संस्कार में हुए पॉलिटिकल ड्रामे को 98 फीसदी लोगों ने बताया गलत
भिवानी, हरियाणा के रहने वाले कांग्रेस वर्कर और बामला के सरपंच पूर्व फौजी 'रामकिशन' की आत्महत्या को लेकर दो दिन से सियासत हो रही है। राहुल गांधी और केजरीवाल दोनों वन रैंक वन पैंशन यानी OROP के नाम पर ऐसे राजनीति कर रहे हैं, जैसे कि दोनों सैनिकों के बहुत बड़े हितैषी हैं। टीवी-चैनलों के प्रसारण और फुटेज को देखकर लगता है कि दोनों इस होड़ में लगे हैं कि कौन सबसे बड़ा हितैषी है। लेकिन देश की जनता और पूर्व सैनिक राहुल और केजरी के राजनीति गोटी सेट करने की चाल को समझ रहे थे। इसको लेकर सोशल साइट्स पर लोगों ने जमकर गुस्से का इजहार किया। 95 फीसदी लोगों ने इनकी घटिया राजनीति पर सवाल खड़ा किया। वहीं, पूर्व फौजी के अंतिम संस्कार को लेकर जो हाई पोलिटिकल ड्रामा हुआ। उसको लेकर भी सोशल साइट्स में भारी नाराजगी है। 98 फीसदी लोगों ने इसको लेकर राहुल और केजरीवाल को लानत भेजी है।
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर भिवानी और देश के दूसरे हिस्सों में चल रहे इस ड्रामेबाजी पर लोगों ने खुलकर अपनी राय रखी है। हमने भी सोशल मीडिया पर इसके तह तक जाने की कोशिश की। जो नतीजे आए, वो चौंकाने वाले हैं। 2 नवंबर को OROP से जुड़े करीब 30,000 (तीस हजार) पोस्ट सोशल मीडिया पर डाले गए। इसमें से 28,000 (अट्ठाइस हजार) से अधिक पोस्ट के माध्यम से लोगों ने राहुल और केजरीवाल पर तंज कसा, तरह-तरह के आरोप लगाए। इन पोस्ट को हजारों लोगों ने रिट्विट भी किए। केवल और केवल 1500 (पंद्रह सौ) लोगों ने अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी को मिलाकर समर्थन किया। उसमें भी कुछ लोग मौत पर सियासत न करने की सलाह देते दिखाई दे रहे थे।
मीडिया फुटेज लेने की होड़ में आगे रहने के लिए राहुल गांधी और केजरीवाल को भिवानी के गांव बामला जाने पर मजबूर कर दिया। सोशल मीडिया एक्सपर्ट के अनुसार, पूर्व फौजी के अंतिम संस्कार को लेकर करीब 5,000 (पांच हजार) लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी। ज्यादातर ने रागा और केजरी की जमकर आलोचना की। महज 2 फीसदी लोगों ने OROP और पूर्व फौजी की खुदकुशी को लेकर सवाल उठाएं हैं। प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था को हाईजैक करने की कोशिश करने वाले इन राजनीतिक ड्रामेबाजों पर 98 फीसदी लोगों ने सवाल उठाए। इसमें 65 फीसदी लोगों ने अंतिम संस्कार की राजनीतिकरण करने और इस पर ड्रामेबाजी करने पर राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल की आलोचना की है। 33 फीसदी लोगों ने माना है कि विरोधी पार्टियां इस मुद्दे को केवल विरोध करने के लिए विरोध कर रही है। असल मुद्दे से इन्हें कोई मतलब नहीं है।
सोशल मीडिया के इन आंकड़ों से कई बातें साफ हैं।
1. लाशों की राजनीति करने वाले राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल की असल नीयत के बारे में लोगों को पता चल चुका है।
2. जनता को इतना पता चल चुका है कि जिस OROP को लेकर राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं, दरअसल उसे खत्म करने वाले उनके ही अपने रिश्तेदार यानी इंदिरा गांधी हैं। इसके बाद चार दशक तक सारे कांग्रेसी कुंडली मारकर बैठे रहे। 10 साल के यूपीए शासनकाल के दौरान भी राहुल गांधी ने कुछ नहीं किया।
3. आम जनता ही नहीं बल्कि पूर्व सैनिकों ने भी इस खुदकुशी को लेकर शंका जाहिर की, या फिर इस राजनीतिक हथकंडेबाजी को लेकर सवाल उठाए। मसलन दानापुर में रहने वाले पूर्व सैनिक रामनाथ सिंह (@ramnaths1959) ने ट्विट में जो लिखा। उसमें उन्होंने दो बातें कही है। पहली यह कि वर्तमान मोदी सरकार ने जो OROP लागू किया है, उससे वह पूरी तरह से संतुष्ट हैं। दूसरी बात यह कि रामकिशन ने आत्महत्या नहीं की है। उसकी हत्या हुई है। उन्होंने भी रामकिशन की मौत को लेकर साजिश से इनकार नहीं किया है।
अब राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल जैसे नेता ये समझ लें कि वो राजनीति को किस दिशा में लेकर जा रहे हैं। पल भर को मान भी लें कि उन्हें इससे राजनीतिक फायदा मिल भी जाए... लेकिन क्या राष्ट्रहित को कमजोर करके ऐसी राजनीति करना सही है?
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Staff Writer · Media Khabar
