'आज तक' चैनल के रिपोर्टर पुण्य प्रसून वाजपेयी हमेशा की तरह आज भी पटरी से उतरे हुए हैं। हड़ताल पर उनका भ्रम साफ दिख रहा है, न निगल पा रहे हैं, न उगल पा रहे हैं और जबरन डबल विंडो में बीजेपी की रैली के साथ उसका घालमेल कर के खिचड़ी पकाए दे रहे हैं।
अचानक कभी स्वेदेशी जागरण मंच के किसी नेता का प्रोफाइल बताने लगते हैं, तो कभी अहमदाबाद के बस स्टैंड पहुंच जाते हैं।
उधर उनकी सहयोगी महिला रिपोर्टराएं नई दिल्ली। स्टेकशन पर भारी भीड़ बता रही हैं, लेकिन फ्रेम में सामान्य दिनों से कम भीड़ दिख रही है।
अंजना कश्यप रेलवे स्टेशन पर खड़ी होकर हिंदू आतंकवाद पर बात करते हुए थूक घोंट रही हैं, तो एक पुरुष रिपोर्टर श्रम मंत्री से ही पूछ बैठा है कि बताइए देश में क्या हाल है।
इसी आपाधापी में प्रसून के मुंह से निकल गया है, ''... बीजेपी हिंदुत्व आतंकवाद के ज़रिये राजनैतिक अलख जगाने में लगी है...।'' अरे बाप!
बीजेपी, आंदोलन, रैली, हड़ताल, श्रम मंत्री, जनता, बस स्टेशन, हिंदू आतंकवाद, बस, टैक्सी्, रेलवे, अस्पताल, शिंदे, खड़गे... जाहिर है... जाहिर है... जाहिर है... और अचानक छोटा सा ब्रेक, ब्रेक के बाद आकर बताएंगे कि राजनाथ सिंह के भाषण के बाद यहां से मार्च निकलेगा (&^%$*#$@)... रे भाई, पहले ही बता दिया, अब लौट कर क्या बताओगे?
अरे, कोई इन्हें बताओ कि जंतर-मंतर पर एनडीएमसी का एक शौचालय भी है जहां प्रेशर रिलीज़ किया जा सकता है। मइकवा दाएं से बाएं और बाएं से दाएं हाथ में लउकाने से कुछ नहीं होगा.....
(पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव की एक टिप्पणी. उनके फेसबुक वॉल से साभार)
