लंबे समय तक जेल में रहने के कारण जी न्यूज के संपादक औऱ बिजनेस हेड सुधीर चौधरी का चेहरा जो लोग नहीं देख पा रहे थे, अब देख पा रहे हैं. उन्हें लख-लख बधाई. वैसे भी चैनल के संपादक की शोभा न्यूजरुम में अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलते रहने में ही है न कि अन्याय और भ्रष्टाचार करने पर जेल चले जाने से. कुछ अपराधियों को तो अपराध से मुक्त रखा ही जा सकता है. है कि नहीं ?
फर्ज कीजिए कि दामिनी का दोस्त सुधीर चौधरी से कहता- आपको ये नैतिक अधिकार नहीं है कि आप अन्याय के खिलाफ हमसे सवाल कर सकें. ये अधिकार आप खो चुके हैं तो वाकई हिन्दी सिनेमा का कोई सुपरहिट डायलॉग हो जाता लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया. कुछ बुद्धिजीवी फिल्मकारों के भरोसे छोड़ दिया.
Poojaditya Nath सुधीर चौधरी को देख के एक राजस्थान कि कहावत याद आ गयी... "नकटे तेरी नाक कटी? नाता बोला नहीं, वो तो और ऊंची हो गयी." सुधीर चौधरी बेहतरीन अदाकार हैं...पत्रकार नहीं अदाकार....
Asrar Khan ये बधाई की बात है या निंदा की ...ये चैनल जो खुद भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं और जमानत पर छूटे हुए हैं क्या उन्हें इस तरह से परदे पर आना चाहिए ..?
Vatsala Shrivastava सुधीर चौधरी को देखते लगा की मौके को अपनी छवि सुधारने के लिए use कर रहे हैं, ताकी लोग उनको आज से corrupt पत्रकार के रूप में नहीं बल्कि "sensible" interview लेने वाले महान, sensitive पत्रकार के रूप में याद करे ...ये भी मौके को अपने लिए भुना ले गए...
Rangnath Singh सवाल यह भी है कि अन्ये मीडिया हाउस या पत्रकारों ने इतनी महत्व पूर्ण स्टोnरी सुधीर चौधरी को थाली में रख कर क्यों परोस दी ?
(विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से )
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