[caption id="attachment_21331" align="alignright" width="225"]
टाटा स्काई का रिमोट [/caption]अपनी तो दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस सबके सब टीवी के साथ ही बीततीं है..बैचलर्स किचन में एकमुश्त खाने-पीने की चीजें बना-जुटा लो..सुबह उठते ही माँ-भाभी और दीदी लोग को फ़ोन कर दो ताकि दिनभर फोन करके अकच न करें- हम यहाँ लौंगलता चाभ रहे हैं औ वहां दिल्ली में अकेला बैठा बुतरू बूट(चना) फुलाकर खा रहा होगा..8 बजे ही इतनी चीजों के नाम गिना दो कि सब कॉम्प्लेक्स में आ जायें..उसके बाद देखो जमकर टीवी..इससे अच्छा मुझे कोई त्यौहार मनाना ही नहीं आता..
लेकिन रात साढ़े नौ बजे जब 8 साल से साथ दे रहे रिमोट ने अचानक जवाब दे दिया, म्यूट के अलावा कोई दूसरा बटन काम ही नहीं करने लगा तो समझ गया- लग गयी मेरी ऐन मौके पर बत्ती..टाटा स्काई को फ़ोन किया.
एक्टिव जावेद के नाम पर जितने पैसे कटे, उतने में गुलजार की cd आ जाती..खैर, कई राउंड में इंग्लिश-हिंदी-हिंगलिश-पिन्ग्लिश मिक्स जुबान से गुजरते हुये, ठीक-ठाक बैलेंस कटाते हुये जब बात मुद्दे तक पहुंची तो तै हुआ कि कल कभी भी आपको नया रिमोट मिल जायेगा..
बातचीत में मैंने कह दिया- आप जिस अंदाज़ में बात कर रहे हो, आपमें कहीं से टाटा स्काई का संस्कार नहीं है..नहीं तो लद्दाख की लड़की का अगर टाटा स्काई में फोन लग जाता है तो उसकी छतरी भी लग जायेगी का वादा होता है.
बात बन्दे को लग गयी..अभी तक संस्कार का मसला सिर्फ परवरिश और माँ-बाप से जोड़कर देखा जाता रहा है, कंपनी से नहीं..सो जब कहा- 12 बजे तक भेज सकते हैं तो ठीक है नहीं तो फिर आप नहीं अबकी बार मैं लाइफ झींगा-ला-ला करूँगा.
आज सुबह जो सबसे पहली फोन कॉल आई वो है- सर, मैं आपके दरवाजे के आगे खड़ा हूँ, टाटा स्काई से बोल रहा हूँ, आपको रिमोट डिलीवर करनी है, दरवाजा खोलिये..
8 साल का सफ़ेद रिमोट जिसने दिल्ली के कितने ठिकाने देखे, जिस पर कितनी बार मसाले,नमक के स्वाद और रंग चढ़े, अब आर्काइव मटेरियल हो गया और ये ब्लैक वर्तमान..
(स्रोत-एफबी)
टाटा स्काई का रिमोट [/caption]अपनी तो दीवाली, होली, ईद, क्रिसमस सबके सब टीवी के साथ ही बीततीं है..बैचलर्स किचन में एकमुश्त खाने-पीने की चीजें बना-जुटा लो..सुबह उठते ही माँ-भाभी और दीदी लोग को फ़ोन कर दो ताकि दिनभर फोन करके अकच न करें- हम यहाँ लौंगलता चाभ रहे हैं औ वहां दिल्ली में अकेला बैठा बुतरू बूट(चना) फुलाकर खा रहा होगा..8 बजे ही इतनी चीजों के नाम गिना दो कि सब कॉम्प्लेक्स में आ जायें..उसके बाद देखो जमकर टीवी..इससे अच्छा मुझे कोई त्यौहार मनाना ही नहीं आता..
लेकिन रात साढ़े नौ बजे जब 8 साल से साथ दे रहे रिमोट ने अचानक जवाब दे दिया, म्यूट के अलावा कोई दूसरा बटन काम ही नहीं करने लगा तो समझ गया- लग गयी मेरी ऐन मौके पर बत्ती..टाटा स्काई को फ़ोन किया.
एक्टिव जावेद के नाम पर जितने पैसे कटे, उतने में गुलजार की cd आ जाती..खैर, कई राउंड में इंग्लिश-हिंदी-हिंगलिश-पिन्ग्लिश मिक्स जुबान से गुजरते हुये, ठीक-ठाक बैलेंस कटाते हुये जब बात मुद्दे तक पहुंची तो तै हुआ कि कल कभी भी आपको नया रिमोट मिल जायेगा..
बातचीत में मैंने कह दिया- आप जिस अंदाज़ में बात कर रहे हो, आपमें कहीं से टाटा स्काई का संस्कार नहीं है..नहीं तो लद्दाख की लड़की का अगर टाटा स्काई में फोन लग जाता है तो उसकी छतरी भी लग जायेगी का वादा होता है.
बात बन्दे को लग गयी..अभी तक संस्कार का मसला सिर्फ परवरिश और माँ-बाप से जोड़कर देखा जाता रहा है, कंपनी से नहीं..सो जब कहा- 12 बजे तक भेज सकते हैं तो ठीक है नहीं तो फिर आप नहीं अबकी बार मैं लाइफ झींगा-ला-ला करूँगा.
आज सुबह जो सबसे पहली फोन कॉल आई वो है- सर, मैं आपके दरवाजे के आगे खड़ा हूँ, टाटा स्काई से बोल रहा हूँ, आपको रिमोट डिलीवर करनी है, दरवाजा खोलिये..
8 साल का सफ़ेद रिमोट जिसने दिल्ली के कितने ठिकाने देखे, जिस पर कितनी बार मसाले,नमक के स्वाद और रंग चढ़े, अब आर्काइव मटेरियल हो गया और ये ब्लैक वर्तमान..
(स्रोत-एफबी)M
Media Khabar
Staff Writer · Media Khabar
