सरकार का विस्तृत नियंत्रण योजना
भारत सरकार सोशल मीडिया कंटेंट को ब्लॉक करने की शक्तियों को एक से अधिक मंत्रालयों के पास देने की योजना बना रही है। वर्तमान में यह अधिकार सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पास केंद्रित है, लेकिन नई व्यवस्था में विभिन्न विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा सकेंगे।
यह निर्णय डिजिटल भारत के संदर्भ में लिया जा रहा है, जहां सरकार सामग्री नियंत्रण को अधिक विकेंद्रीकृत तरीके से संचालित करना चाहती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से संबंधित कंटेंट पर तुरंत कार्रवाई करना है।

किन मंत्रालयों को मिलेगी यह शक्ति
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और अन्य प्रमुख विभागों को सोशल मीडिया ब्लॉकिंग की शक्तियां प्रदान की जा सकती हैं। प्रत्येक मंत्रालय अपने क्षेत्र से संबंधित संवेदनशील सामग्री को ब्लॉक करने के लिए अधिकृत होगा।
यह कदम सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के नियम 69 में संशोधन के माध्यम से लागू किया जा सकता है। इसके तहत सरकार को डिजिटल सामग्री पर नियंत्रण के लिए कानूनी ढांचा मिलेगा।
डिजिटल स्वतंत्रता पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। जब कई मंत्रालयों को अलग-अलग ब्लॉकिंग शक्तियां मिल जाएंगी, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध अधिक मनमाने ढंग से लागू हो सकते हैं।
नागरिक अधिकार संगठनों ने पहले ही चेतावनी दी है कि ऐसी व्यवस्था का उपयोग राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए किया जा सकता है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन जैसी संस्थाएं इस तरह के विस्तृत नियंत्रण को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध मानती हैं।
वैश्विक संदर्भ और तुलना
भारत पहला देश नहीं है जो सोशल मीडिया पर सरकारी नियंत्रण बढ़ा रहा है। चीन, रूस और अन्य देशों में भी डिजिटल सामग्री पर कड़े नियंत्रण लागू हैं। हालांकि, भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, इसलिए यहां इस तरह के कदमों पर अधिक बहस और विरोध होता है।
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पहले ही सोशल मीडिया पर अत्यधिक प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज उठाई है। वे मानते हैं कि ऐसी नीतियां अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का उल्लंघन करती हैं।
निष्कर्ष
सरकार की यह योजना डिजिटल भारत में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। जहां एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी सुरक्षित रखना समान रूप से महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में इस नीति पर व्यापक जनता, विशेषज्ञों और कानूनी समुदाय की प्रतिक्रिया देखी जाएगी।
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Staff Writer · Media Khabar





