केजरीवाल चैनलों पर इतना अच्छा बोलते थे कि मन करता था कि वह बस बोलते रहें,मगर...
बोल भाई बोल...!! तारकेश कुमार ओझा बोलना एक कला है, यह तो सभी जानते हैं, लेकिन इसके साथ कई विशेषताएं , विडंबनाएं और विरोधाभास भी जुड़े हैं। जिसकी ओर लोगों का ध्यान कम ही जाता है। मसलन ज्यादातर अच्छे - भले कर्मयोगी अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप अच्छा बोल नहीं पाते। कभी एेसी नौबत आती भी है तो वह कांपते हुए...
